157 पानी 5 तरह के होते है, जानिए पीने के लिए सबसे अच्छा पानी कौन सा है, RO के पानी की असलियत

 पानी 5 तरह के होते है, जानिए पीने के लिए सबसे अच्छा पानी कौन सा है, RO के पानी की असलियत



नमस्कार दोस्तों, आपका एक बार फिर से हमारी वेबसाइट में बहुत बहुत स्वागत है. यहाँ आपको राजीव जी के बताये हुए हर प्रकार के नुस्खे एवं औषधियां प्राप्त होंगी. तो दोस्तों आज की हमारी चर्चा का विषय है “आरो (RO) का पानी”. इस आरो का पानी अच्छा है या नहीं है, आपको दो-तीन मिनट ही पता चल जायेगा. आयुर्वेद का मानना है कि सबसे उत्तम पानी है बारिश का पानी. तो अगर आप बारिश का पानी इक्कट्ठा कर लें और साल भर पीयें तो आपसे भाग्यशाली कोई और नही होगा.

अब आप सोच रहें होंगे की भला पानीं कैसे इक्कट्ठा कर सकतें है. तो इसका जवाब बहुत ही आसान है. आपकी जो छत है उस छत को तो आपने सीमेंटेड कराया ही होगा. छत में से जो पानी गिर रहा है उसको किसी पाइप के जरिये किसी टैंक में लगा दीजिए. अंडर ग्राउंड टैंक बना दीजिए, उसमें पूरा पानी डाल दीजिए. बारिश के पानी का कोई एक्सपायरी डेट नहीं है. अगर अंडर ग्राउंड टैंक में आपने पानी जमा कर लिया तो ये पानी आप 2 साल से 3 साल तक पी सकते हैं इसमें कोई तकलीफ नहीं आएगी.

राजस्थान में हर गाँव में पानी का टैंक रहता है. वहां बारिश कम होती है. इसलिए वहां के लोग एक एक बूँद पानी की इक्कट्ठा करतें हैं. वहां जॉन्डिस की बीमारी कभी नहीं होती. क्योंकि वहां के लोग बारिश का पानी पीते हैं जो की अमृत के सामान काम करता है. दूसरा पानी जो सबसे अच्छा माना जाता है उसको नदियों का पानी कहा जाता है. वह नदियां जो ग्लेशियर से जुड़ी होती है जैसे की गंगा नदी. क्योंकी ग्लेशियर की बर्फ जमती है फिर पिघलती है और फिर उससे पानी बनकर नदियों में जाता है. इसलिए ये पानी भी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है.

तीसरा सबसे अच्छा पानी होता है तालाबो का पानी. और चौथा अच्छा पानी होता है बोर्ड का जो बारिश के पानी को ही रिचार्ज करके बोरिंग में आता है. और पांचवां सबसे अच्छा पानी होता है म्युनिसिपल कारपोरेशन का. जो आप पीते हैं अब आप जरा सोच लीजिए म्युनिसिपल कारपोरेशन का पानी सबसे लास्ट में है यानी की बाकि पानीओ से सबसे खराब है. म्युनिसिपल पानी से अच्छा है की आप दो से दस हजार का एक बार खर्चा करें और अपनी छत पर एक स्लोप बना दीजिये. इस स्लोप में पाइप लगा कर पानी अंडरग्राउंड टैंक में इकठ्ठा कर लें. राजीव जी ने बताया की उन्होंने स्वयं के घर में स्लोप बनाया जिसका तकरीबन 22000 खर्च आया. और हर साल वह उस स्लोप से एक लाख लीटर पानी कलेक्ट करते हैं.

इस विडियो में देखिए पानी का सच >>

राजीव जी ने बताया की उनका घर सेवाग्राम में है. उनका घर छोटा सा है. उसी घर में उन्होंने स्लोप बना कर बारिश का पानी अंडर ग्राउंड इकठ्ठा करने का प्रबंध कर लिया, और वह और उनके पड़ोसी सिर्फ वही पानी पीते हैं. राजीव जी के अनुसार पंजाब के वासी उनसे भी ज्यादा पानी इक्कठा कर सकते है क्योंकी पंजाब में बारिश ज्यादा होती है. आजकल पानी की खपत बढ़ती जा रही है लेकिन ज़मीन के निचे वाला पानी सूखता चला जा रहा है. एक दिन ये पानी खत्म हो जायेगा. इसलिए अभी से बारिश के पानी को इक्कठा करना शुरू कर दें.

अगर आप बारिश के पानी को साफ़ रखना चाहते है, तो इसमें कोई भी केमिकल इस्तेमाल न करें बल्कि चूना डाल दीजिए. बारिश जैसे ही शुरू हुई छत पर चूने का पत्थर डाल दीजिए तो जितना भी पानी कांटेक्ट में आएगा सब फिल्टर होकर आएगा. तो इससे मिट्टी का उसमें दुष्प्रभाव खत्म हो जाएगा तो छत का पानी कोशिश करिए इकट्ठा करने का. नहीं कर सकते हैं तो आपके पास कॉरपोरेशन का पानी है इसको बिना उबाले मत पीजिये. अब आप कहेंगे इस पानी को RO में डालें और फिल्टर करें और उबाले और पिए? तो दोनों में क्या बेहतर है? हमारी मानिये तो उबालना बेहतर है. क्योंकि आरो में पानी फिल्टर करते समय उसके कुछ ऐसे केमिकल खत्म हो जाते हैं जो हमारे शरीर को बहुत जरूरी होते है. इसलिए आरो का पानी तो मजबूरी का पानी है जब कुछ भी नहीं मिल रहा है तो इसको पी लीजिये.

राजीव जी ने बताया की उन्होंने हर ब्रांड के आरो पर रिसर्च की जिससे उन्हें पता चला की इससे पानी की परफॉरमेंस कम हों जाती है, कभी कैल्शियम तो कभी आयरन. तो उन्होंने आरो बनाने वालो को चिट्ठिया लिखी की इसकी क्वालिटी ठीक कर दें. तो उनका जवाब आया की हम पानी साफ़ करने की मशीन बनाते है न कि क्वालिटी हाई करने की.

भगवान के पानी से ज्यादा शुद्ध तो कुछ हो ही नहीं सकता. बारिश के पानी को मिट्टी के टैंक में रखना सबसे अच्छा है. कांच की बोतल भी चल जाएगी. कांच, मिट्टी का ही दूसरा स्वरूप है. सिलिका को थोड़ा प्यूरीफाई करते हैं तो कांच बन जाता है. जिनको बरमकेला, अस्थमा ट्यूबरक्लोसिस आदि जैसे रोग हैं इनको हर समय गर्म पानी ही पीना चाहिए.

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किसी कम्पनी ने अपने उत्पाद बेचने के लिए बिकाऊ मीडिया के साथ मिलकर R.O. की झूठी मनगड़ंत कहानी क्या सुनाई, सारी दुनिया भेडचाल में पागल हो गयी और सबने लगवाया लिया यह सिस्टम. सब अपने आप में एक्सपर्ट बन बैठे की इतने TDS का पानी सही, इतने TDS गलत. RO ये कर देगा RO वो कर देगा. फुल बकवास.. अरे मेरे भाई यह तो सोच लेते, की जब RO नहीं था तब क्या लोग ज्यादा बीमार थे , पिने को शुद्ध पानी नहीं मिलता था. अब कुछ मुर्ख यह तर्क देंगे की अब पानी ज्यादा गन्दा हो गया इसलिए RO की जरुरत पड़ी.. पहली बात तो मेरे महान ज्ञानियों इस बात को समझो की पानी कितना ही गन्दा हो जाए उसके लिए हमारे पास मुफ्त जी हाँ बिलकुल मुफ्त की तकनीक है तो उसे छोड़कर आप सब क्यूँ पागल बने डोल रहे हो.. और अभी भी RO से विश्वास नही टूट रहा हो तो जान लो यह सब बातें..


वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो बोतलबंद पानी का कारोबार खरबों में पहुंच गया है। शुद्धता और स्वच्छता के नाम पर बोतलों में भरकर बेचा जा रहा पानी भी सेहत के लिए खतरनाक है। यह बात कई अध्ययनों में उभरकर सामने आई है। इसके अलावा बोतलबंद पानी के इस्तेमाल के बाद बड़ी संख्या में बोतल कचरे में तब्दील हो रहे हैं और ये पर्यावरण के लिए गंभीर संकट खड़ा कर रहे हैं।









158  अगर आप खाना खाने के बाद ये काम करेंगे तो कभी भी खाना नहीं पचेगा, बल्कि सड़ेगा  

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