158 अगर आप खाना खाने के बाद ये काम करेंगे तो कभी भी खाना नहीं पचेगा, बल्कि सड़ेगा

 अगर आप खाना खाने के बाद ये काम करेंगे तो कभी भी खाना नहीं पचेगा, बल्कि सड़ेगा



नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर से आपका हमारी वेबसाइट में बहुत बहुत स्वागत है. यहाँ आपको राजीव जी द्वारा बताई गयी हर प्रकार की औषधियां एवं घरेलू नुस्खे प्राप्त होंगे. तो दोस्तों आज की हमारी चर्चा का विषय है कि खाने के बाद पानी न पीयें. तो दोस्तों छोटे बच्चे बहुत ही सेंसटिव होते हैं. बच्चो को बीमारियाँ बहुत जल्दी पकड़ लेती हैं. ज्यादातर 14 साल तक के बच्चों को साडी,खांसी और जुकाम की शिकायत रहती है. 14 साल से 40 साल तक के लोगो को पित में शिकायत रहती है. और इससे ज्यादा उम्र के लोगों को भी कई प्रकार की बिमारिया रहती हैं. तो यूँ कहिये कि बीमारियाँ किसी भी उम्र में हमारा पीछा नही छोडती.

जो रोग 40 साल की आयु से शुरू हों जायेंगे तो वो ज़िन्दगी भर हमारा पीछा नही छोड़ते. लेकिन घबराईये मत दोस्तों हर एक बीमारी का इलाज़ सम्भव है अगर ठीक से कोशिश की जाये तो. अष्टांग हृदय में भागवटी जी कहते हैं कि ज़िन्दगी भर में वाग़, पित और खांसी को कंट्रोल में रखना ही सबसे बड़ी कला है. तो इन तीनो चीजो को संतुलित रखने के लिए करना क्या होगा? चलिए जानते हैं.

इन तीनो बिमारिओ को दूर रखने के लिए सबसे पहला सूत्र ये है कि कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नही पीना चाहिए. तकरीबन 100 में 99 ऐसे लोग है, जो पानी लिए बिना खाना नही खाते. और बहुत सरे लोग तो खाने से भी ज्यादा पानी लेते हैं. क्यों की हमारे शरीर का पूरा केंद्र हमारा पेट है. ये पूरा शरीर पेट की ताकत से ही चलता है. और पेट चलता है भोजन की ताकत से. क्यों कि भोजन ही पेट को उर्जा देता है और फिर ये पेट उस भोजन को आगे ट्रान्सफर करदेता है.

अमाशय यानी कि महदा सारा भोजन इसी में जमा होता है और ये एक थेली की तरह काम आता है. इसमें अधिक से अधिक 350 ग्राम खाना समा सकता है. खाना जैसे ही अमाशय में पहुँचता है तो तुरंत इसमें अग्नि जल जाती है. ये आग रसोई गैस की तरह ही होती है. जैसे ही हम खाना खाते है अंदर जठर में आग जलती है. जब तक खाना डाइजेस्ट न हो जाये, तब तक ये अग्नि जली रहती है. यही अग्नि खाना पचाती है.

आपने ठंडा पानी पी लिया खूब पानी पी लिया कई लोग तो बोतल पे बोतल डाल लेते हैं तो जो आग जल रही थी वह बुझ गई आग अगर बुझ गई तो खाने की पचने की जो क्रिया है वह बंद हो गई अब हमारे पेट में दो ही क्रियाएं होती है खाने के पचने में एक क्रिया है जिसको हम कहते हैं डाइजेशन दूसरी है फर्मेंटेशन फर्मेंटेशन का मतलब है सरना और डाइजेशन कमाने है पचना आग अगर जलेगी तो खाना पचेगा खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा आयुर्वेद के हिसाब से आपकी आग जलेगी खाना पचेगा तो रस बनेगा जो रस बनेगा उसी में से मांस बनेगा उसी रास्ते से मजा बनेगी फिर उसी रस में से रक्त बनेगा फिर उसी में से वीर्य बनेगा फिर उसी में से हड्डियां बनेगी फिर उसी में से मल बनेगा फिर उसी में से मूत्र भी बनेगा तो मांस मज्जा रक्त वीर्य मल-मूत्र हड्डी यह सब बनता है यह तब बनेगा जब खाना पचेगा.

अब जरा ध्यान से सुने शब्दों को मांस की जरूरत है मज्जा की भी जरूरत है रक्त की भी जरूरत है वीर्य की भी जरूरत है अस्थि भी चाहिए यह सब हमें चाहिए क्या नहीं चाहिए मल नहीं चाहिए और मूत्र नहीं चाहिए तो मल और मूत्र तो बनेगा जरूर लेकिन वह हमें चाहिए नहीं शरीर को चाहिए नहीं तो शरीर हर दिन उसको छोड़ देगा माल को भी छोड़ेगा मित्र को भी छोड़ेगा बाकी जो चाहिए शरीर उसको धारण करेगा खाना जब पचेगा हजम होगा तोरस बनेगा उससे मांस मज्जा अस्थि मल-मूत्र इत्यादि बनेगा मल-मूत्र की जरूरत नहीं है शरीर उसको छोड़ देगा बाकी सब चीजों की जरूरत है शरीर उसको धारण करेगा यह एक है. दूसरी तरफ क्या होगा आग नहीं चलेगी आपने गटागट पानी पी लिया तो वही खाना सड़ेगा उसके बाद उसमें से जहर बनेगा









159   ये एक गलती आपके शरीर को बहुत ख़राब हालत में लेकर जा सकती है  

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इस विडियो में देखिए ये कैसे काम करता है >>

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