204 सिर से लेकर पाँव तक शरीर के सभी रोगों के लिए एक दवा

 सिर से लेकर पाँव तक शरीर के सभी रोगों के लिए एक दवा



हमारे शरीर में रोगों को तीन हिस्सों में बनता गया है वात, पित्त और कफ. अलग अलग रोगों के लिए अलग अलग औषधियां भरपूर मात्र में हमारे देश में पायी जाती हैं लेकिन क्या ऐसा भी है की तीनो प्रकार की बिमारियों के लिए कोई एक औषधि है जी हाँ,

तीनो श्रेणी के रोगों से निपटने के लिए आयुर्वेद में एक ही ऐसी औषधि है जिसे हम त्रिफला कहते हैं त्रिफला का मतलब तीन फल, यह एक प्रकार का फल होता है जो तीन फलों के मिश्रण से बना है जो की आंवला, हरड, बहेड़ा है

त्रिफला बनाने के नियम

त्रिफला में तीनो फलों को पीसकर एक दो और तीन के अनुपात में रखा जाता है

वागभट जी त्रिफला चूर्ण के बारे मे और बताते है कि त्रिफला चूर्ण मे तीनों फलो की मात्रा कभी समानय नहीं होनी चाहिए । ये अधिक उपयोगी नहीं होता (आज कल बाज़ारों मे मिलने वाले लगभग सभी त्रिफला चूर्ण मे तीनों फलों की मात्रा बराबर होती है )

त्रिफला चूर्ण हमेशा 1:2:3 की मात्रा मे ही बनाना चाहिए अर्थात मान लो आपको 600 ग्राम त्रिफला चूर्ण बनाना है तो उसमे

हरड चूर्ण होना चाहिए     =    100 ग्राम

बहेडा चूर्ण होना चाहिए    =    200 ग्राम

और आमला चूर्ण चाहिए  =     300 ग्राम

तो इन तीनों को मिलाने से बनेगा सम्पूर्ण आयुर्वेद मे बताई हुई विधि का त्रिफला चूर्ण । जो की शरीर के लिए बहुत ही लाभकारी है । वागभट जी कहते है त्रिफला का सेवन अलग-अलग समय करने से भिन्न-भिन्न परिणाम आते है । रात को जो आप त्रिफला चूर्ण लेंगे तो वो रेचक है अर्थात (सफाई करने वाला) पेट की सफाई करने वाला ,बड़ी आंत की सफाई करने वाला शरीर के सभी अंगो की सफाई करने वाला । कब्जियत दूर करने वाला 30-40 साल पुरानी कब्जियत को भी दूर कर देता है ये त्रिफला चूर्ण  और सुबह त्रिफला लेने को पोषक कहा गया , अर्थात अगर आपको पोषक तत्वो की पूर्ति करनी है वात-पित कफ को संतुलित रखना है तो आप त्रिफला सुबह लीजिये सुबह का त्रिफला पोषक का काम करेगा !

और अगर आपको कब्जियत मिटानी है तो त्रिफला चूर्ण रात को लीजिये त्रिफला कितनी मात्रा मे लेना है ?? किसके साथ लेना है रात को कब्ज दूर करने के लिए त्रिफला ले रहे है तो एक टी स्पून (आधा बड़ा चम्मच) गर्म पानी के साथ लें और ऊपर से दूध पी लें. सुबह त्रिफला का सेवन करना है तो शहद या गुड़ के साथ लें तीन महीने त्रिफला लेने के बाद 20 से 25 दिन छोड़ दें फिर दुबारा सेवन शुरू कर सकते हैं ।

इस प्रकार त्रिफला चूर्ण आपके बहुत से रोगो का उपचार कर सकता है इसके अतिरिक्त अगर आप राजीव भाई द्वारा बताए आयुर्वेद के नियमो का भी पालन करते हो तो ये त्रिफला और भी अधिक और शीघ्र लाभ पहुंचाता है जैसे मेदे से बने उत्पाद बर्गर, नूडल, पिजा आदि ना खाएं ये कब्ज का बहुत बड़ा कारण है, रिफाईन तेल कभी ना खाएं, हमेशा शुद सरसों, नारियल, मूँगफली आदि का तेल खाएं, सेंधा नमक का उपयोग करें ।

हो सके तो त्रिफला का चूर्ण दुकान से न लें क्यूंकि उसमें नही पता लगा सकते की तीनों फल किस मात्रा में हैं बाजार से तीनो फल खरीद कर लायें और घर पर ही पीसकर चूर्ण बना लें







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